क्यों हो रही है समाज की सोच में तबदीली। त्योहारों के प्रति।


क्यों समाज के लोगों में त्यौहारों के पति आजकल सोच बदलती जा रही है। अब जैसे हम बात करते हैं होली की तो होली के त्यौहार को ग्रामीण स्तर पर काफी नीचे गिरा दिया है। होली के प्रति लोगों की सोच बहुत नीचे गिर चुकी है। ग्रामीण स्तर पर लोग होली के दिन इस्तेमाल होने वाले रंगों में घरेलू रंगों की मिलावट करके एक दूसरे पर इस्तेमाल करते हैं। जिससे गांव के लोगों में होली खेलना तो दूर होली के नाम पर होली के दिन एक दूसरे से दूरी बनाए रखना और होली जैसे त्यौहार में कोई दिलचस्पी नहीं रखना। यह एक बहुत बड़ी बात है। होली जैसा त्योहार साल में एक बार आता है और यह मार्च महीने में मनाया जाता है। होली के दिन दुश्मन लोग भी एक दूसरे के साथ रंग खेलते हैं और मौज मस्ती करते हैं। लेकिन ग्रामीण स्तर पर होली का त्योहार काफी गिर चुका है।



आओ हम सब मिलकर अपने त्योहारों की विरासत को सम्भाले। यही हमारा कर्तव्य है। नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ी हमसे पूछेगी अनसुलझे कई सवाल। जिनका हमारे पास ना होगा कोई जबाब।

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आओ हम सब मिलकर अपने त्योहारों की विरासत को सम्भाले। यही हमारा कर्तव्य है। नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ी हमसे पूछेगी अनसुलझे कई सवाल। जिनका हमारे पास ना होगा कोई जबाब।

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