गौ दान का सामाजिक महत्व।



Social significance of cow donation.

सामाजिक स्तर (Social Level) पर पौराणिक प्रवृतियों (Legendary Trends) का मेल जोल आज भी स्थित है। कई ऐसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं जो सामाजिक प्राणी (Social Animal) के हित को अन्तिम अवस्था (Final Stage) के समय मुक्ति के द्धार को खोल देते हैं और यह धारणा कई सदियों से इन्सान के दिमाग में अपनी पैठ बना चुकी है जो आज के इस युग में एक आवस्यक निर्णय (Important Decision) माना जाता है। जिसका नाम है “गऊ दान” एक ऐसी प्रक्रिया है जो सामाजिक प्राणी के मुक्ति द्धार को खोल देती है। और अन्तिम क्षणों में जब मानव अपना शरीर त्याग देता है उसके बाद आत्मा के अपने स्थान तक जाने वाले रास्ते में जो मुश्किलें आती है और उन मुश्किलों से छुटकारा पाने के लिए “गऊ दान” करवाया जाता है। “गऊ दान” करने के सामाजिक स्तर (Social Level) पर कई प्रकार के तरीके है जिन्हे लोग अपनाते है और अपने बजुर्गों को अन्तिम क्षणों में आने वाली कठिनाइयों से बचाते है।



कई बार यह “गऊ दान” उस समय भी कर लिया जाता है। जब इन्सान अच्छी अवस्था में होता है और अच्छी अवस्था में किया हुआ “गऊ दान” आपके मुक्ति द्धार में आने वाली सभी कठिनाइयों को दूर करता है। गौ माता के शरीर 88,000 देवी देवता वास करते है और “गऊ दान” करते समय मंत्रो उच्चारण में भी इसका वर्णन किया जाता है। और जब मानव अपना शरीर छोड़ देता है और अगर आपने “गऊ दान” किया हो तो मुक्ति के समय आने वाली सभी मुश्किलें दूर होती है और मानव को स्वर्ग का मिलता है इस तरह की विचारधारा का उधग्म हमारे सामाजिक स्तर (Social Level) पर विध्यमान (Existing) है। और इस तरह के धार्मिक संचालनों को इन्सान सदियों से चलाता आ रहा है।

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धन्यबाद

जितेंदर शर्मा

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गौ दान का सामाजिक महत्व।

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