भारत में 500 और 1000 के नोट बन्द करने के पीछे किसका हाथ है और यह क्यों जरुरी है पढ़े नोटबन्दी पर DNA


दोस्तों भारत को आज़ाद हुए कितना समय हो गया और पिछले 70 सालों से क्या हुआ कौन सी सरकार ने क्या किया ये सब बातें मैं यहाँ पर नहीं लिखना चाहता क्योंकी यह सब बातें आप अच्छी तरह से जानते हैं। जब तक आप यह सारे का सारा आर्टिकल नहीं पढ़ेंगे तो आपको इस बात में आंकलन करना मुश्किल होगा की हमारे देश में 500 और 1000 के नोट क्यों बन्द किये गए हैं और इस करन्सी को आप लोग सोच रहें है कि अचानक क्यों बन्द किया गया। चलो आओ अब हम मुद्दे की बात करते हैं। 8 नम्बर 2016 से लेकर अब तक 500 और 1000 के नोटों को लेकर हाहाकार मचा है। कहीँ हम सुन रहे हैं की पैसे ना मिलने से लोग हत्या कर रहे हैं, मार पीट कर रहे हैं और कुछ लोग एक दूसरे को देख कर हाहाकार मचा रहे है। चलो आप सब लोगों को ये भी पता है हमारे लिए यह कहना बहुत आसान की 500 और 1000 के नोट सरकार ने अचानक बन्द कर दिए। नहीं दोस्तों इस क्रिया के ऊपर पिछले 16 सालों से काम हो रहा था परन्तु हम आम लोगों तक यह क्रिया 16 साल बाद पहुंची ये हम लोगों की बदनसीबी है और अगर यह नोट बदलने की क्रिया 16 साल पहले आ गई होती तो आज हमारा भारत और भारत का हर नागरिक दुनियां के देशों में सबसे ताकतवर होता परन्तु ऐसा भी नहीं है की अभी 500 और 1000 के नोट बदलने से हम आने वाले 2 सालों में ही दुनियां के ताकतवर मुल्कों में सुमार हो जायेंगे।



“अर्थक्रान्ति” के कॉन्सेप्ट्स के जरिये यह 500 और 1000 के नोट बदलने का प्राबधान हुआ है। आप लोग अच्छी तरह से जानते हैं की भारत देश के लोगों ने अपने दिमाग से दुनियां को एक नई सोच दी है और भारत देश में ऐसे लोग कब अचानक सामने आ जाएं कोई कुछ नहीं बता सकता। “अर्थक्रान्ति” कॉन्सेप्ट्स भारत में ही तैयार किया गया और इस “अर्थक्रान्ति” कॉन्सेप्ट्स में काम करने वाले लोग भी भारतीय हैं “अनिल बोकिल” जो की पुणे के रहने वाले हैं और “अनिल बोकिल” एक “अर्थक्रान्ति” “एन जी ओ” के प्रमुख हैं जिन्होंने 16 साल पहले इस “अर्थक्रान्ति” “एन जी ओ” की नींब रखी। “अनिल बोकिल” ने “अर्थक्रान्ति” के जरिये नम्बर 2013 में जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब “अनिल बोकिल” को सिर्फ 9 मिनट का ही समय मिला था अपनी इस स्कीम को बताने का कि किस तरह से भारत में पैसों की कालाबाजारी को रोका जा सकता है। परन्तु 2013 के तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहे श्री नरेन्द्र मोदी जब “अनिल बोकिल” की इस स्कीम को सुनने लगे तो 2 घण्टे तक सुनते रहे। और समझ भी लिया की अब इस स्कीम को कब और कैसे लागु करना है। और जब से श्री नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने हैं तब से जिस भी काम में हाथ डाला है वह सफलता की ओर ही गया है। तो भला अब यह 500 और 1000 के नोटों को बन्द करने की स्कीम कैसे असफल होगी। यहाँ इस वीडियो में आप देख सकते हैं।

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