सोच समझ कर ले अपनी जिन्दगी के निर्णय। जिन्दगी है अनमोल।


जिन्दगी बहुत अनमोल है दोस्तों इसे यू ही नहीं बरबाद कीजिये। अक्सर हमने देखा है हमारी आम जिन्दगी में जब हमारी दिनचर्य शुरू होती है और हम सब अपने कामों में जुट जाते हैं। अब यहां पर सबसे जरूरी यह देखना है कि हम अपने कितने काम अपने ही घर पर निपटा लेते हैं और कौन-कौन से काम है जिनके लिए हमें अपने दोस्तों से, अपनी नजदीकी मार्केट में जाना पड़ता है। मान लीजिए अभी आप मार्केट से कोई सामान खरीद कर लाए जिसकी आपको अभी जरूरत थी। लेकिन ठीक 2 दिन बाद आपको अपने दोस्त से किसी बिजनेस मीटिंग को लेकर मिलना है। लेकिन जब आप मार्केट से वापस आए तो आपने सोचा कि 2 दिन बाद मुझे अपने दोस्त से बिजनेस की मीटिंग के लिए मिलना है तो चलो अभी होकर आता हूं। आपने अपना बाइक या गाड़ी स्टार्ट किया और अपने दोस्त दोस्त से मिलने चले गए लेकिन रास्ते में आपकी बाइक का एक्सीडेंट हो गया और आप की मृत्यु हो गई इसे कहते हैं।

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क्यों हो रही है समाज की सोच में तबदीली। त्योहारों के प्रति।

अपने दिमाग के ऊपर और अपने मन के ऊपर कंट्रोल नहीं होना। खुदा करे ऐसा ना हो। आप इस आर्टिकल को पढ़ रहे हो वीडियो देख रहे हो। खुदा करे ऐसा ना हो लेकिन ऐसी स्थिति में बहुत सारे एक्सीडेंट हो चुके हैं और बहुत से लोगों ने अपनी जान गंवाई है। मान लीजिए आपने मार्केट से अपनी जरुरत के अनुसार समान खरीद लिया और घर वापस आ गए। अब 2 दिन बाद आपके दोस्त के साथ बिजनेस मीटिंग है लेकिन आप अभी उससे बात करने निकल गए मतलब आपके घर पर आप खुश नहीं है आप अपने घर पर समय व्यतीत नहीं कर सकते तो आपने सोचा कि 2 दिन बाद का काम है उसे आज ही निपटा लेता हूं। और हो लिया एक्सीडेंट। नहीं अपने दिमाग को जरा लगा कर देखें। जब आपने अपने दोस्त के साथ ठीक 2 दिन बाद बिजनेस मीटिंग का वादा कर दिया है। तो फिर आप आज उससे क्यों मिलने जा रहे हो सकता है आपको इससे फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो नुकसान में 99% चांस है और फायदे में 1% चांस है। क्या आपने अपने दोस्त को पहले फोन किया क्या उससे पूछा कि मैं आज फ्री हूं तो जो बिजनेस मीटिंग हमें ठीक 2 दिन बाद करनी है क्या हम आज ही उसे कर ले। लेकिन आपने ऐसा नहीं किया आपने अपनी नजदीकी मार्केट से जो सामान खरीद कर लाना था वह खरीद कर लाए और अपना बाइक स्टार्ट किया और अपने दोस्त से बिना फोन पर बात कीए ही चले गए और रास्ते में आप का एक्सीडेंट हो गया।



जब भी आप कोई एक काम निपटा लेते हैं तो दूसरे काम को निपटाने से पहले जरा सोचिए क्या मुझे अपने दोस्त को फोन कर लेना चाहिए कि मैं आज आऊं या ना आऊं क्योंकि अगर आप उसे फोन कर लेते हो तो आपके दोस्त को लगेगा कि हो सकता है कि मेरा दोस्त फ्री है तो वह चाहता है कि आज ही मीटिंग कर ली जाए। अब जरा ध्यान दीजिए अगर आप अपने दोस्त से फोन पर यह पूछ लेते हो कि हम आज मीटिंग कर लेते हैं अगर वह मना कर दें तो आप उसके पास जाएंगे क्यों, बाइक स्टार्ट करेंगे क्यों, और आपका एक्सीडेंट होगा क्यों, तो सबसे जरुरी है मन के ऊपर काबू करना दिमाग से सोचना फिर फैसला लेना।

कैसे चलती है एक आम आदमी की जिन्दगी आओ सुनते हैं एक आम आदमी कि जुबानी।

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क्या सोच समझ कर ले अपनी जिन्दगी के निर्णय।

इसके बारे में अपने विचार दें।

  • क्या गलत निर्णय से हम अपना नुक्सान कर लेते हैं।
    93
  • सोच समझ कर ही निर्णय लें।
    89
  • क्या भावुक होकर भी निर्णय लिए जाते हैं।
    57

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