बदलता मौसम, बदलती दुनियाँ, बदलता पहनावा, बदलती मानवीय सोच।



बदल रहा है मौसम सारी दुनियाँ में।

सारे संसार के लोग ये जानते हैं कि मौसम कीस कदर बदल रहा है। और बदले भी क्यों नहीं जब मनुष्य आदि मानव था एक बंदर के रूप में था तो जब आदिमानव से इन्सान बन गया तो मौसम को बदलने हक़ क्यों नहीं। पहले आदिमानव साधारण जीवन व्यतीत करता था आज जमाना देश दुनियाँ बदल चुकी हैं । आज की दुनियाँ में नहाने के लिये साबुन की फैक्ट्रियाँ (Factories) लगी है, आज की दुनियाँ में पहनने वाले कपड़ों को तैयार करने में फैक्ट्रियाँ (Factories) लगी है, एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिये गाड़िया हैं, आज की दुनियाँ में लोगो के पास आधुनिक घर हैं, आज की दुनियाँ में बड़े बड़े बाज़ार बन चुके है, आज की दुनियाँ में इन्सान की हर जरूरत को पुरा करने के लिये टेक्नोलॉजी (Technology) का इस्तेमाल हो रहा है और इस बदलते मौसम को भी इस संसार के ही मानव ने बदला है। इन्सान ने अपनी जरूरतों को पुरा करने के लिये गाड़ियों का निर्माण किया, फैक्ट्रियों (Factories) का निर्माण किया, हथियारों का निर्माण किया, हरे भरे पेड़ों को काट कर बड़े बड़े शहरों (Big Cities) का निर्माण किया। उपजाऊ योग्य भूमि पर अपने रहने के लिए घरो का निर्माण किया। इसलिए ही भगवान ने इन्सान का निर्माण किया। तो फिर इस बदलते मौसम  (Changing Weather) का भी इन्सान ही जिम्मेबार है भगवान नहीं और बदलने के लिये ही भगवान ने पृथ्वी ग्रह पर मनुष्य का निर्माण किया और इसी पृथ्वी ग्रह के मनुष्य भगवान की पूजा करता भी करते है।



आपको भी पता है की आज की इस दुनियाँ में लोगों के पास गाड़ियां हैं जिनसे ढेर सारा धुँआ निकलता है जो वातावरण को दूषित कर रहा है। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुँआ वातावरण को दूषित कर रहा है। आप कुछ ही दसको के बारे में सोचों पहले सर्दियों का मौसम कैसा होता था और कितना समय रहता था गर्मियों का मौसम कैसा होता था और कितना समय रहता था और आज के इस मौसम के बारे में सोचो पहले सर्दियों का मौसम अक्टूबर से शुरू हो जाया करता था और मुश्किल से फरवरी तक ही चलता था युँ कह लीजिए की मानव को गर्म कपड़ों की जरुरत केवल तीन या चार महीने ही पड़ती थी और बाकी के सात से आठ महीने गर्म मौसम हुआ करता था परन्तु धीरे धीरे मौसम के हालत बदल रहे हैं। अब सर्दियों का मौसम सितम्बर से शुरू होकर मार्च के अंत तक चल रहा है अगर हम अभी की बात करें तो लोगों ने अप्रैल में भी गर्म कपडे पहनने से नहीं छोड़े हैं दिन प्रतिदिन हो रही वर्षा से ठण्ड रूकने का नाम ही नहीं ले रही। मतलब अप्रैल चल रहा है परन्तु गर्मियों का मौसम अभी भी शुरू नहीं हुआ है। अब हालात पलटी मार रहे हैं पहले सर्दियों का मौसम तीन से चार महीने होता था और आने वाले समय में सात से आठ महीने चलेगा और भारत के लोग और भी गोरे हो जायेंगे।

लोगों के गोरे होने की बात तो सही है परन्तु देश की सरकार को इस फैलते प्रदुषण के ऊपर लगाम लगानी पड़ेगी फ़ैक्टरियों से निकलने वाले धुएँ से वातावरण दिन प्रतिदिन प्रदुषित होता जा रहा है बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग दुनियाँ के लिए अभिशाप साबित होगी।

इस बदलती दुनियाँ (Changing The world) का बदलना भी तय है और यही मानव जाती है भगवान ने इन्सान को इसी रूप से नवाज़ा है। बदलती दुनियाँ में आज गाँव गाँव में सड़कें बन रही हैं बाहनो की संख्या तेजी से बड़ रही है बाहनो से निकलने वाले घुएं में भी बढ़ोतरी हो रही है टुरिस्ट पलेसों को तबदील किया जा रहा है हर देश के लोग एक दूसरे के देशों में घूमने के लिये जा रहे हैं। अत्यधुनिक हथियारों का निर्माण किया जा रहा है हर देश अपने आप को शक्तिशाली बनाने में जुटा है। दिन प्रतिदिन नये नये हथियारों का निरीक्षण किया जा रहा है एक दूसरे देश को हथियारों से भयभीत करने की होड़ में लगा है जमीन से लेकर आसमान और आसमान से लेकर पानी तक एक दूसरे देशों ने हथियारों का जाल बिछा रखा है ये तेरे देश की सीमा और ये मेरे देश की सीमा बस इसी जंजाल में फसकर रह गया है मानव।

दुनियाँ में आदमी से लेकर औरत तक के पहनावे में बदलाव (Changing Clothing) आ चुका है आज की इस दुनियाँ में पहनावे में इतनी अश्लीलता आ चुकी है की हर इन्सान एक दूसरे की खूबसूरती को पाने के पीछे पागल है इन्सान के मन की सुन्दरता अपनी अन्त सीमा पर है इस दिखावे की दुनियाँ में। एक पल तो आदमी उस औरत को सुन्दर मान लेता है जो दिखने में तो सुन्दर है और ऊपर से अगर उसने सुन्दर कपड़े डाले हो।

मानवीय सोच (Changing Human Thinking) इतनी बदल चुकी है की इन्सान एक दूसरे को जान से मारने पर उतारू हो जाता है लुटेरे दस रुपए के लिए हाथ काट देते हैं। सौ रुपए के लिए आगरा के पास कुछ युबको के एक युबक को पीट पीट कर मार दिया और गाँव से दूर नदी के किनारे फैंक दिया। छोटे बड़ों से तमीज तक भूल गए हैं। जायदात के लिए भाई भाई को मारने तक आ जाते हैं।

दुनियाँ के हर इन्सान को वातावरण को दूषित होने से बचाने में योगदान देना चाहिए। जलबायु में बढ़ते तापमान से दुनियाँ के देशों ये नहीं भुलना चाहिये की धरती के ऊपर एक तिहाई स्तर पर ही मानव जीवन है बाकि सारा पानी से भरा समुद्र बढ़ते जलवायु के तापमान से समुद्र स्तर को मानवीय जीवन को तवाह करने में सालों नहीं लगेंगे।

इस वीडियो को देखकर आपको पता चल जायेगा की हमारा वातावरण कौन से स्तर पर है। 

65.0Overall Score
दुनियाँ में बदलते मौसम के बारे में आपकी रॉय। क्या आप मौसम को साफ़ सुथरा रखना चाहते हैं।

अपने विचार कमेंट के रूप में व्यक्त करें।

  • बदलते मौसम के बारे में आपकी रॉय।
    52
  • क्या आप मौसम को साफ़ सुथरा रखना चाहते हैं।
    78

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>